केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, डायरेक्टर प्रकाश झा, भारतीय मूल के फिल्म प्रोडूसर और डायरेक्टर राहिल अब्बास और यूनाइटेड किंगडम के पूर्व मेंबर ऑफ़ पार्लियामेंट बेथन सय्यद ने भी इस किताब की तारीफ की है

बिहार की रहने वाली 15 साल की नैय्या प्रकाश ने लॉकडाउन के दरम्यान एक किताब लिखी ‘एंड आई पास्ड्स माई बोर्ड्स विदआउट इवेन अपीयरिंग फॉर इट’। उनकी यह किताब इन दिनों चर्चा में है। किताब लॉकडाउन के समय क्लास 10 की तैयारी कर रही छात्रा की जुबानी है। नैय्या बिहार के मुजफ्फरपुर की रहने वाली हैं। उनके पिता कर्नल रमेश प्रकाश दार्जिलिंग के सुखना में कर्नल हैं और मां दिव्या प्रकाश ने सिम्बायसिस से MBA किया है। मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा, लक्ष्मी चौक के पास इनका घर है और दादा डॉ.रामेश्वर राय अंग्रेजी के प्रोफेसर रह चुके हैंं।

नैय्या ने भास्कर से बातचीत की
नैय्या ने भास्कर को बताया कि लॉकडाउन ने कई चीजों से हमें दूर रखा। क्लास से दूर, दोस्तों से दूर, इस सब के बावजूद इस समय का इस्तेमाल हमने बेहतर तरीके से किया। कई नई बातें हम सीख पाए। कुल 20 चैप्टर में इन बातों का विस्तार से जिक्र किया है। फैमिली के साथ, समय बिताने का कितना अच्छा मौका मिला! लॉकडाउन ने हमें सबसे जरूरी बात सिखाई कि फैमिली वैल्यू क्या चीज होती है और किसी भी ऑपर्चुनिटी का इस्तेमाल कैसे करना है। कैसे विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य नहीं खोना है। 16 लीव्स ने इसे प्रकाशित किया है।

मुजफ्फरपुर में किताब लिखना शुरू किया
नैय्या ने केन्द्रीय विद्यालय, IIT चेन्नई से 10 वीं किया है। जिस समय कोविड का कहर तेज था उस समय 14 अप्रैल को ये मुजफ्फरपुर आई थीं। वहीं से ऑनलाइन पढ़ाई कर रही थीं। 10 वीं के एग्जाम को लेकर जैसी जागरूकता बाकी बच्चों में होती है, नैय्या में भी थी। लेकिन ऑनलाइन क्लासेज से क्लासरूम जैसी पढ़ाई नहीं हो पा रही थी। सभी को डर था कि कहीं इसका असर रिजल्ट पर न पड़ जाए। आगे बोर्ड एग्जाम कैंसल कर दिया गया और इंटरनल असेसमेंट के आधार पर पास कर दिया गया। ठीक उसी समय मुजफ्फरपुर में रहते हुए नैय्या ने इस किताब को लिखना शुरू किया।

कई चर्चित लोगों ने की तारीफ
इस किताब की तारीफ फिल्म निर्देशक प्रकाश झा, IIT टी मद्रास के डायरेक्टर भास्कर राममूर्ति, चाइल्ड एंड क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट गगनदीप कौर आदि ने की है। निशांत पोखरियाल और नितिन गडकरी ने भी इसे सराहा। कुल 154 पेज की इस किताब में 21 इलेस्ट्रेशन नैय्या ने खुद बनाए हैं। वह फाइन आर्ट आर्टिस्ट भी है और बैडमिंटन भी काफी अच्छा खेलती हैं।

कई बार पेरेंट्स बच्चों को ठीक से समझ नहीं पा रहे थे
नैय्या की मां दिव्या रमेश प्रकाश कहती हैं कि कोरोना महामारी के समय लोगों की नौकरियां जा रहीं थीं, जान पर आफत बनी हुई थी। सभी घर में बंद हो गए थे। बच्चों पर पढ़ाई का गहरा दबाव था, सवाल करियर का था। टीचर से मिलकर बात करना मुश्किल था। कई बार तो पैरेंट्स, बच्चों को ठीक से समझ नहीं पा रहे थे। ऐसे समय का इस्तेमाल नैय्या ने इन बातों को मोटिवेशनल तरीके से लिखने में लगाया कि कैसे विपरित परिस्थिति में भी बेहतर किया जा सकता है।

बच्चों ने लॉकडाउन के समय जो बातें सीखीं, जैसे कि खाना बनाना, बाल काटना, बर्तन धोना, कम पैसे में जीना वह कोई स्कूल इस तरह से नहीं सिखा सकता। पेंडमिक ने कई अच्छी चीजें भी दी हैं। इस सब को खूबसूरती के साथ किताब में नैय्या ने रखा है।

Source: Dainik Bhaskar

नैय्या प्रकाश की किताब को निचे लिखे किसी भी प्लेटफार्म से प्राप्त किया जा सकता है

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